Wednesday, 9 August 2017

हीरा फेरी- सुरेन्द्र मोहन पाठक

जीत सिंह सीरिज का एक बकवास उपन्यास।

यह जीत सिंह सीरिज का 11 उपन्यास है।
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कतरे कतरे का है नसीब जुदा, 
कोई गौहर कोई शराब हुआ।

ये था जीतसिंह की खानाखराब जिन्दगी का मुकम्मल फलसफा । 

“अपनी तकदीर से शिकवा किया, बुरे वक्त का मातम मनाया, बदनसीबी को कोसा, करोड़ों का माल हाथ लगा, दिल में खुशी की जगह दहशत है, उमंग की जगह अंदेशा है ।”
           सुरेन्द्र मोहन पाठक द्वारा लिखा गया उपन्यास हीरा फेरी, जी हां- हीरा फेरी.
 कहानी-
उपन्यास में कहानी है दुबई से आने वाले चार सौ हीरों की जिनकी कीमत बीस करोङ है। जैसे ही यह खबर अंडरवर्ल्ड में पहुंचती है की अंडरवर्ल्ड डाॅन अमर नायक के चार सौ करोङ के हीरे आ रहें है तो उनको लूटने के लिए कई लुटेरे तैयार हो जाते हैं।
  चार सौ हीरों की लूट को लेकर मची हाहाकार में कई अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं।

   प्रस्तुत उपन्यास की कहानी किसी भी रूप से रोचक नहीं है, लगता है जैसे उपन्यास को अनावश्यक विस्तार दिया गया है।
उपन्यास जीत सिंह सीरिज का है लेकिन यहाँ जीत सिंह न भी होता तो भी उपन्यास पर कहानी कोई भी किसी भी किसी भी प्रकार का फर्क नहीं पङने वाला था। पूरे उपन्यास में जीत सिंह साइड रोल में नजर आता है। उपन्यास  का केन्द्र तो सुहैल पठान और विराट पड्या पर रहता ही रहता है।
    कुल 350 पृष्ठ की इस उपन्यास में अंतिम पचास पृष्ठ पर जाकर कहानी कुछ रफ्तार पकङती है और रोचक भी बनती है। बाकी तीन सौ पृष्ठ में हीरों के लूटने वाले व्यक्ति की तलाश ही चलती रहती है।
  इस विषय पर असंख्य कहानियाँ, उपन्यास व फिल्म बन चुकी है इसलिए विषय रोचक होकर भी प्रस्तुतीकरण के अभाव में नीरस लगता है।

संवाद-
पात्रों की भाषा मुंबईया है, जो कहानी के अनुरूप है।
संवाद छोटे और कहानी के प्रवाह में उपयोगी हैं।
लेखक ने उपन्यास के पीछे कुछ मुंबई या शब्दों के हिंदी अर्थ भी दे रखें हैं। यह एक अच्छा प्रयास है।
ड्रम- दस करोङ
चकरी- गन
कच्चा लिंबू- नया आदमी।
येङा- पागल।
भीङू- बंदा, साथी।

कहानी की पृष्ठभूमि मुंबई के अंडरवर्ल्ड पर आधारित है। इसी प्रकार से इनके पात्र भी वही मुंबई भाषा बोलते हैं।
पात्र-
  उपन्यास मुंबई अंडरवर्ल्ड पर आधारित है जिसके कारण  में पात्रों की संख्या भी बहुत ज्यादा है लेकिन कोई भी पात्र अनावश्यक प्रतीत नहीं होता। सभी पात्र कहानी के अनुसार सही हैं।  
अमर नायक- मुंबई अंडरवर्ल्ड का डाॅन।
नवीन सोलंके- अमर नायक का डिप्टी।
हुसैन डाकी- दुबई और मुंबई के बीच डायमंड सप्लायर।
शिशिर सांवत- अमर नायक का वह व्यक्ति जो डायमंड डिलीवर लेने जाता है।
जोकम फर्नान्डो- शिशिर सावंत का साथी, अमर नायक का वह व्यक्ति जो डायमंड डिलीवर लेने जाता है।
अलीशा वाज- जोकम फर्नान्डो की प्रेमिका।
कीरत मेधवाल उर्फ जनरैल- नये मवाली लोगों का सलाहकार ।
विराट पड्या और सुहैल पठान- अमर नायक के स्मगलिंग के हीरों को लूटने की प्लान बनाने वाले।
जीत सिंह- एक टैक्सी ड्राइवर ।
गाइलो- जीत सिंह का साथी, टैक्सी ड्राइवर ।
देशपांडे- कस्टम अधिकारी, हीरों का पारखी।
वीरेश हजारे- कस्टम अधिकारी।

अन्य पात्र मगन कुमरा, किशोर पूनिया, तारानाथ, भाऊराव, टैक्सी मालिक , वीजू, पुलिस।

लेखकिय-
लेखक ने लेखकिय को दो भागों में विभक्त किया है। प्रथम भाग एक पृष्ठ से कम का है जिसमें पीछले व इस उपन्यास का वर्णन है।
लेखकिय का द्वितीय भाग आठ पृष्ठों में फैला है जिसमें वसीयत का जिक्र है। विभिन्न प्रकार के लोगों की विभिन्न प्रकार से की गयी वसीयत का जिक्र किया गया है।
लेखकिय पढकर लगा था की शायद उपन्यास में ऐसी कोई कहानी होगी लेकिन उपन्यास और लेखकिय का कोई संबंध नहीं, पता नहीं लेखक ने ये आठ पृष्ठ को काले कर दिये।

   सुरेन्द्र मोहन पाठक के प्रशंसकों को यह उपन्यास निराश नहीं करेगा।

सुमोपा की प्रथम कहानी सन् 1959 'सतावन साल पुराना आदमी' मनोहर कहानियाँ में प्रकाशित हुयी।
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में
1963- में प्रथम उपन्यास 'पुराने गुनाह, नये गुनहगार।
smpmystrywriter@gmail.com
सुरेन्द्र मोहन पाठक को हिंदी का सर्वश्रेष्ठ मिस्ट्री राइटर माना जाता है।
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उपन्यास- हीरा फेरी
लेखक- सुरेन्द्र मोहन पाठक
प्रकाशक- हार्पर काॅलिंस
ISBN 978-9-352-64443-8
www.HarperCollins.com
पृष्ठ- 350
मूल्य- 150