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Monday, 31 July 2017

54. फांसी मांगे बेटा कानून का- अशोक कुमार शर्मा

राजस्थान के सीकर जिले के एक गांव रूपगढ के लेखक हैं अशोक कुमार शर्मा। अशोक कुमार शर्मा उस दौर के लेखक हैं जब उपन्यास जगत के अच्छे दिन थे।

      प्रस्तुत उपन्यास 'फांसी मांगे बेटा कानून का' अशोक शर्मा जी की जगतार सिंह जग्गा सीरिज की श्रृंखला का एक उपन्यास है, और कहानी भी उसी क्रम में आगे बढती है।
' छत्तीस करोङ का हार', ' मैं बेटा बंदूक का', और प्रस्तुत उपन्यास ' फांसी मांगे बेटा बंदूक का' और इसके बाद इसी क्रम का आगामी उपन्यास था ' कानून वाल' और उससे भी आगे यह उपन्यास अगर जाता है तो मुझे जानकारी नहीं।

"मैं कोई पीर पैंगबर, औलिया फरिश्ता तो हूँ नहीं, जिनके लिए कोई भी इंसान अपनी जान देने में गर्व महसूस  कर सके। मैं तो तेरी तरह एक साधारण इंसान हूँ। खुदा का एक गुनहगार बंदा, जो अपने गुनाह बख्शवाने के लिए दर दर की ठोकरें खाता फिर रहा है।  चढ जाने दे मितरा इस गुनहगार को फांसी पर, ताकि इस गुनहगार को वाहेगुरु सच्चे पातशाह के पास जाकर चिर शांति मिल सके"- जगतार सिंह जग्गा।
कहानी-
       जगतार सिंह जग्गा एक एक प्रसिद्ध वकील है और वह अखबार में न्याय की दुकान नाम से विज्ञापन भी देता है।
माधुरी सिंह एक प्रसिद्ध माॅडल गर्ल है और वह अपनी शादी का विज्ञापन देती है की जो उसे डाॅन भानुप्रताप सिंह की मिल्कियत में से छत्तीस करोङ का हार चुराकर पहनायेगा वह उसी से शादी करेगी।
इसी क्रम में जगतार सिंह जग्गा माधुरी के संपर्क में आता है और वह माधुरी के प्यार में अति सुरक्षित हार की चोरी कर लेता है।
  यहीं से जगतार सिंह जग्गा और डाॅन में दुश्मनी पैदा होती है। जग्गा के हाथों डाॅन मारा जाता है।
  डाॅन के चार सेनापति हरनाम सिंह, गोम्स गौंजाल्विज, बाबू खां सलमानी और जीवन लाल मारवाङी मंत्रणा कर डाॅन के वजीर बाजीराव भौंसले को नया डाॅन बनाते हैं।
नया डाॅन जगतार सिंह जग्गा से दुश्मनी का बदला लेने के लिए माधुरी का अपहरण कर उससे सामूहिक बलात्कार करता है।
तब जगतार सिंह जग्गा अपने महदर्द मित्रों की मदद से डाॅन के साम्राज्य को खत्म करने का निर्णय ले लेता है, और एक एक कर डाॅन के सेनापति मारे जाते हैं।
(उपर्युक्त कहानी छतीस करोङ का हार और मैं बेटा बंदूक की है)
प्रस्तुत उपन्यास 'फांसी मांगे बेटा बंदूक का' में जग्गा और डाॅन की जंग अनवरत जारी है और जग्गा डाॅन के दो और सेनापति बाबू खां सलमानी व गोम्स गौंजाल्विज को मार देता है।
  जगतार सिंह जग्गा का एक साथी प्यारा सिंह जीवन लाल मारवाडी को मारने के चक्कर में स्वयं फंस जाता है।
पुलिस प्यारा सिंह को ही जगतार सिंह जग्गा बनाकर अदालत में पेश कर देती है और प्यारा सिंह भी स्वयं को जग्गा साबित कर देता है।
जब जग्गा को इस हकीकत का पता चलता है वह स्वीकार अदालत में पेश होता है।
आगे क्या हुआ- यह जानने के लिए अशोक कुमार शर्मा का उपन्यास ' कानून वाला' पढना होगा।
     प्रस्तुत उपन्यास सुरेन्द्र मोहन पाठक के प्रसिद्ध पात्र विमल की नकल पर तैयार किया गया है। उसी प्रकार उपन्यास के कवर पेज पर जगतार सिंह जग्गा उर्फ रमेश चोपङा उर्फ करतार सिंह ग्रेवाल नाम लिखें हैं।
प्रस्तुत उपन्यास में नायक से ज्यादा अन्य पात्रों की अनावश्यक वार्ता हावी रहती है।
एक थ्रिलर उपन्यास में जो पाठक की मांग होती है वैसा उपन्यास में कुछ भी नहीं है। पाठक बङी मुश्किल से उपन्यास को पूरा पढ पायेगा।
इसी उपन्यास में अगर लेखक अपनी मौलिकता का परिचय देता तो ज्यादा अच्छा होता।

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उपन्यास- फांसी मांगे बेटा बंदूक का
लेखक- अशोक कुमार शर्मा
प्रकाशन- राधा पॉकेट बुक्स- मेरठ
पृष्ठ- 222
मूल्य-_20₹
संपर्क-
अशोक कुमार शर्मा पुत्र मदन लाल शर्मा
मु.पो.- रूपगढ
वाया- कौछोर
जिला- श्री गंगानगर
राजस्थान- 332406

2 comments:

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  2. उपन्यास हो या फिल्मे सभी किसी न किसी फॉर्मूले की तलाश में रहते हैं। इसलिए जो एक बार चल जाता है उसी की तर्ज पर कुछ भी लिखकर बिकवाना चाहते हैं। ये इसलिए होता है क्योंकि प्रकाशक असल में व्यापरी हैं और अक्सर ये भूल जाते हैं की नक़ल असल से ऊपर कभी नहीं जाएगी। आप उस वक्त तो पाठकों को ठग सकते हैं लेकिन वो रचना कभी भी याद रखने लायक नहीं बनेगी। मौलिकता हमेशा बरकरार रहेगी।

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